Nalanda University: नालंदा यूनिवर्सिटी का चौंका देने वाला रहस्य

Nalanda University: नालंदा महाविहार का नींव 5th  Century bc में महात्मा बुद्ध के समय के दौरान रखी गई थी, और इसे यूनिवर्सिटी की तरह विकास 5th century ad में कुमार गुप्त नें करवाया था |

Nalanda University

नालंदा यूनिवर्सिटी में 16000 km दूर से लोग पढ़ने आया करते थे जिनमे से एक थे  “Hiuen Tsang”

फिर आखिर कैसे इतने बड़े यूनिवर्सिटी का नामोनिशान तक मीट गया ? क्या इसे जलाया गया ? या फिर इसे तोड़ दिया गया ? या फिर ये यूनिवर्सिटी उन समय के राजा के राजनीति की शिकार हो गई ?

या फिर इसको बाहरी आक्रमणकारियों ने इसको मिटाया ? इसके बारे में ये भी कहा जाता है की इनमे पढ़ रहे विद्यार्थियों नें इसमे आग लगाई ? क्या है सच ये आज तक एक रहस्य है |

लगभग 1811-1812 ईस्वी के दौरान बिहार के महाविहार क्षेत्र में लोगों को महात्मा बुद्ध की कुछ मूर्तियाँ मिली, जिसके बाद लोगों ने वहाँ के अधिकारी को इस बात की सूचना दी, ये देख कर

वहाँ के अधिकारी की होश उड़ गए |

सोचने वाली बात तो ये है की जिस यूनिवर्सिटी से नागार्जुन, डिगनागा, और धर्मकीर्ति जैसे महान स्कालर पढ़ कर निकले उस यूनिवर्सिटी का वजूद कैसे मिट गया ?

जिस जगह खुद भगवान बुद्ध के पैर पड़े हो उसका वजूद कैसे मिट गया ?

कुमार गुप्त के निर्माण करवाने के बाद नालंदा यूनिवर्सिटी को पाल साम्राज्य और साथ में हर्षवद्रधन के साम्राज्य नें बहुत सहयोग किया, जिसके सहयोग से नालंदा यूनिवर्सिटी अपने चरम सीमा पर थी |

कहा जाता है की उस समय जो दूसरे राज्य के राजा थे उनके आँखों में नालंदा यूनिवर्सिटी कंकड़ के भांति चुभती थी | वो सभी इसको पाना चाहते थे या यूं कहे की इसको मिटाना भी चाहते थे |

नालंदा पर अलग अलग काल में अलग अलग राजाओं के द्वारा बहुत बार आक्रमण किया गया , लेकिन कहा गया है की ज्ञान की मंदिर को तलवार की धार से काटा नहीं जा सकता | इस प्रकार नालंदा तो बच गई लेकिन अभी इसपर से खतरा टला नहीं था |

Nalanda University
——Nalanda University——

नालंदा यूनिवर्सिटी के समय के दौरान बिहार में तीन और यूनिवर्सिटी भी मौजूद थी जिनका नाम था, ओदन्तपुरी, विक्रमशीला और सोमपुर | इन तीनों को मिलाकर बिहार में कुल चार यूनिवर्सिटी थी, जिनका निर्माण पाल साम्राज्य के द्वारा या दौरान किया गया था |

जो की उस समय बौद्ध साधु या विद्यार्थियों को अपने तरफ आकर्षित करती थी |

कहा जाता है की नालंदा यूनिवर्सिटी में एक बार में 10,000 विद्यार्थियों को 2500 शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाता था |

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